महाराष्ट्र में आदिवासी क्षेत्रों में साक्षरता दर बढ़ाने के नाम पर मजाक हो रहा है। इलाके की आदिवासी छात्राओं को रोज स्कूल जाने के लिए महज एक रुपये मिलता है। हैरानी वाली बात यह है कि 1993 में शुरू हुई इस योजना में पिछले 25 साल से कोई बदलाव नहीं हुआ है।
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