सुबह अलार्म न बजे तो शायद हम वक्त पर काम पर न जा पाएं और अन्य कामों में भी पिछड़ जाएं। लेकिन ज़रा सोचिए, जब घड़ी नहीं थी, अलार्म क्लॉक नहीं थी, तब लोगों को कैसे जगाया जाता था?
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