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Monday, October 21, 2019

मंजिलें और भी हैंः कंधे की चोट भी मेडल जीतने से नहीं रोक सकी

मैं जन्म से एक हाथ से दिव्यांग हूं। इसके बावजूद मैंने कक्षा चार से ही तैराकी सीखना शुरू कर दिया। मैं बंगलूरू का रहने वाला हूं। मे

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