कुछ ऐसा ही है शिया धर्मगुरु मौलाना डॉ. कल्बे सादिक का दुनिया से रुखसत होना। उनकी मृत्यु बस एक इंसान का इंतकाल भर नहीं है बल्कि कई उन परंपराओं पर भी संकट छा जाना है जिनके वह बड़े पैरोकार थे।
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