देश कुमाऊं रेजिमेंट की चौथी बटालियन का कर्जदार है। अगर मेजर सोमनाथ शर्मा के नेतृत्व में इस बटालियन ने साहस और बहादुरी का जज्बा नहीं दिखाया होता तो उस वक्त कश्मीर को हासिल कर पाना संभव नहीं हो पाता। पाकिस्तानी हमलावर 500 के करीब थे, जबकि उन्हें रोक रही भारतीय बटालियन में 50 के आसपास जवान थे।
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